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वन विभाग में CCF के स्‍थान पर APCCF के नए पद बनाने की कवायद

MPNEWSLIVE : 01 जनवरी, 2014
भोपाल ।। हर विभाग के स्ट्रक्चर में कॉडर मैनेजमेंट पिरामिड की तर्ज पर तैयार किया जाता है जिसमें आला अफसरों की संख्या को मैदानी अफसरों की तुलना में बहुत कम रखा जाता है, लेकिन आईएफएस काॅडर रिव्यू का जो प्रस्ताव तैयार हुआ है उसके चलते आईएफएस का काडर मटके के स्वरूप में बदल जाएगा। वन विभाग में एक बार फिर पदों को लेकर कश्मकश शुरू हो गई है। अब मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) के 17 पदों को समाप्त कर उनके स्थान पर एपीसीसीएफ के नये पद बनाये जाने की तैयारी की जा रही है। यदि ऐसा होता है कि तो जहां एक ओर मैदानी अमला कम होगा, तो वहीं अफसरों की भरमार होगी साथ ही समान पद होने के कारण टकराव की भी संभावनाएं बढ़ेगी। फिलहाल इस पर अभी कसरत चल रही है।
यह है प्रस्ताव:
    वन मुख्यालय ने कॉडर रिव्यू में 17 सीसीएफ के पद कम करके एक पद पीसीसीएफ और 16 पद एपीसीसीएफ के बढ़ाए हैं। विभाग के प्रस्ताव के अनुसार एसएफआरआई में पीसीसीएफ को पदस्थ करेंगे। वहीं एपीसीसीएफ के बढ़ हुए 16 पदों में एक को दिल्ली में विभाग के कामकाज के लिए, एक को बालाघाट रेंजर्स कालेज एवं 14 एपीसीसीएफ को वन मुख्यालय में सीसीएफ की जगह पदस्थ करने की तैयारी है।
मैदानी अमला का टोटा:
    वन विभाग में मुख्य वन संरक्षकों के 17 पदों को खत्म कर एपीसीसीएफ के नए पद बनाने की तैयारी की जा रही है। इसी तरह डीएफओ के 6 पद कम कर वन संरक्षक के पद बढ़ाए जा रहे हैं। इसके चलते विभाग में आला अफसरों की जहां भरमार होगी वहीं मैदानी अफसरों का टोटा हो जाएगा। इसके चलते वन मुख्यालय में हर दूसरा अफसर एपीसीसीएफ होगा, लेकिन मैदानी स्तर पर अधिकारियों का टोटा हो जाएगा। वहीं डीएफओ के पदों में कटौती करने से राज्य वन सेवा से अखिल भारतीय वन सेवा में पदोन्नति के अवसर भी कम हो जाएंगे। यही वजह है कि तत्कालीन वनमंत्री सरताज सिंह ने मार्च 2013 में उक्त काॅडर रिव्यू प्रस्ताव में एपीसीसीएफ के मनमाने पदों को बढ़ाने से इंकार करते हुए विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव को अमान्य कर दिया था। इस मामले में तत्कालीन मुख्य सचिव आर परशुराम ने भी आपत्ति लगाई थी। आचार संहिता के दौरान विभाग ने प्रशासनिक कामकाज का हवाला देते हुए नए सिरे से गुपचुप प्रस्ताव तैयार कर इसे प्रमुख सचिव वन बीपी सिंह को भेजा था। सूत्रों का कहना है कि विभाग के आला अफसरों ने उक्त प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजने के लिए मुख्यमंत्री से अनुमोदित करवा लिया है।
पहले भी हुए टकराव:
    विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव के अनुसार वन मुख्यालय में एपीसीसीएफ के अधीन सीसीएफ की जगह एपीसीसीएफ को पदस्थ किया जाएगा। दोनों अफसर समान पद के होने के कारण मुख्यालय में आए दिन टकराव की स्थिति निर्मित होने की संभावना है। इसके पहले भी कई बार मैदानी अफसर वन मुख्यालय के अफसरों से अभद्रता करते रहे हैं। इसमें तत्कालीन सीसीएफ बीके सिंह ने तत्कालीन वन संरक्षण शाखा के प्रभारी सुहास कुमार को फोन पर अपशब्द तक कहे थे।


 
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