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हरित स्वर्ण बाँस पर राष्ट्रीय कार्यशाला

MPNEWSLIVE : 24 जनवरी, 2014
भोपाल।। प्रमुख सचिव वन बसंत कुमार सिंह ने 24 जनवरी को प्रशासन अकादमी में 'बाँस प्रबंधन में सर्वोत्तम तरीकों की खोज : हरित स्वर्ण में निवेश' कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर के बाँस प्रबंधन और बाँस व्यवसाय के विशेषज्ञ, बाँस उद्यमी, बाँस केन्द्रित विभागों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का मूल उद्देश्य प्रदेश में बाँस शिल्प एवं उद्यमियों का विकास करना, राज्य एवं देश के बाँस शिल्पियों, उद्यमियों तथा उद्योगों की कार्य निपुणता और उद्यमिता में प्रभावी वृद्धि करना, बाँस क्षेत्र के विकास से संबंधित विभिन्न हितग्राही को बाँस आधारित समस्याओं के समाधान ढूँढने का अवसर उपलब्ध करवाना है।

बाँस : रोचक तथ्य

  • बाँस फौलाद से अधिक फौलादी।

  • बाँस का लचीलापन 28,000 पीएसआई, फौलाद का 24,000 पीएसआई।

  • बाँस के रेशों से बना कपड़ा हवादार, सुखदायक।

  • बाँस शत-प्रतिशत नष्ट होने योग्य पदार्थ।

  • बाँस प्राकृतिक रूप से एन्टी बेक्टीरियल-एन्टी फंगल।

  • बाँस कोपलें वसा-कैलोरी में कम।

  • बाँस पौधे द्वारा अन्य पौधों की तुलना में 66.6 प्रतिशत अधिक आक्सीजन उत्सर्जन।

  • बाँस निर्मित भवन भूकम्प अवरोधी।

  • बाँस की लकड़ी 3-5 वर्ष में तैयार, अन्य लकड़ी 10-20 वर्ष में।

  • बाँस पौधों को कीटनाशक, रासायनिक खाद की जरूरत नहीं।

  • बाँस कोपलें जानवरों का बेहतर चारा।

  • बाँस की डेढ़ हजार प्रजातियाँ उपलब्ध।

  • अंटार्कटिका छोड़ बाँस विश्व में सब जगह पाया जाता है।

 मिशन संचालक, मध्यप्रदेश राज्य बाँस मिशन, ए.के. भट्टाचार्य ने बताया कि गरीबों की इमारती लकड़ी कहे जाने वाला बाँस आज महत्वपूर्ण उद्योग बनकर देश-विदेश में उभरा है। बाँस उत्पादन से होने वाले बड़े फायदों को देखते हुए अनेक किसान बाँस उत्पादन और उद्योग में रुचि ले रहे हैं।  भट्टाचार्य ने बताया कि बाँस से जबलपुर के किसान रंगा 50 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। मध्यप्रदेश में डेढ़ करोड़ व्यावसायिक बाँस सहित प्रतिवर्ष 75 हजार नोशनल टन बाँस का उत्पादन होता है, जो कुल माँग का मात्र 10 प्रतिशत है। खपत और उत्पादन के मध्य के 90 प्रतिशत के विशाल अंतर को पाटने के लिये मिशन द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं, ताकि बाँस की व्यावसायिक और औद्योगिक माँग की पूर्ति की जा सके। साथ ही किसानों की आर्थिक उन्नति भी हो। कार्यशाला मध्यप्रदेश राज्य बाँस मिशन की भावी रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। कार्यशाला से प्रदेश के बाँस उद्यमियों को राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहुँच बनाने में आसानी होगी। भट्टाचार्य ने बताया कि मिशन द्वारा बाँस उद्यमियों के लिये ऑनलाइन पंजीयन सुविधा भी आरंभ की गई है।

कार्यशाला में 24 जनवरी को बाँस प्रबंधन में राष्ट्रीय और वैश्विक दृष्टिकोण, बाँस प्रबंधन में नवाचार और बाँस प्रबंधन में अनुश्रवण और मूल्यांकन, वनीय क्षेत्रों, निजी क्षेत्रों में बाँस प्रबंधन आदि पर सत्र आयोजित किये गये। कार्यक्रम को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध संचालक राज्य वन विकास निगम आर.एन. सक्सेना, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कार्य आयोजना) अजीत सोनकिया ने भी संबोधित किया। अंत में अंजू भदौरिया ने आभार प्रदर्शित किया।


 
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