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पन्ना टाइगर रिजर्व का बाघ शावकों की मृत्यु से इंकार

MPNEWSLIVE :12 जून , 2014 

भोपाल ।।  पन्ना पार्क प्रबंधन ने टाइगर रिजर्व में बाघ शावकों की मृत्यु से इंकार किया है। क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति का कहना है कि बाघ द्वारा अपने शावक का परित्याग एक स्वाभाविक प्रकृति है। कुशल सुरक्षा प्रबंधन के चलते पन्ना टाइगर रिजर्व के कुनबे को विश्व-स्तरीय गौरव हासिल हुआ है। यह गर्व एवं हर्ष की बात है कि महज 3 वर्ष की अल्पावधि में पन्ना टाइगर रिजर्व का बाघ कुनबा विन्ध्याचल के आधे क्षेत्र में फैल चुका है। दमोह से प्राप्त केमरा ट्रेप चित्रों से इस बात की पुष्टि हुई है कि दमोह में उपलब्ध बाघ पन्ना-121 है। इसके अलावा पन्ना 222 को चन्द्रनगर परिक्षेत्र (छतरपुर) में पहचान कर उसे रेडियो कॉलर पहनाया गया है।

       क्षेत्र संचालक ने बताया कि दिसम्बर, 2013 में पन्ना टाइगर रिजर्व में कम से कम 9 वयस्क एवं अर्ध-वयस्क नर बाघ थे। परन्तु जनवरी-फरवरी में हुई असमय वर्षा के कारण 5 अर्द्ध-वयस्क बाघ पन्ना-411, 412, 121, 122 एवं 123 के टाइगर रिजर्व से बाहर निकलने के प्रमाण मिले हैं। इनके अलावा एक वयस्क बाघ पन्ना-212 ने संजय टाइगर रिजर्व की ओर रुख किया है। अर्द्ध-वयस्क बाघों के कॉरीडोर में स्वछंद विचरण को लेकर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स इन बातों का बराबर ध्यान रखती है।

बाघ पन्ना-212 का ऐतिहासिक उदाहरण

बाघ पन्ना-212 ने विश्व के समक्ष बाघ प्रकृति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। पन्ना 212 ने पन्ना-बाँधवगढ़-संजय टाइगर रिजर्व के खोये हुए कॉरीडोर को पहचाना है। संजय टाइगर रिजर्व में एक बाघिन के साथ जोड़ा बनाकर स्वयं को संजय टाइगर रिजर्व में पुनस्थापित कर लिया है। इस बाघ के सुरक्षित-स्वच्छंद विचरण में पार्क प्रबंधन की निष्ठा और कर्मठतापूर्ण निगरानी की महती भूमिका है। बाघ के विचरण के दौरान दूसरे पार्कों में प्रवेश एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसके कारण रिजर्व में बाघों की संख्या का बढ़ना या घटना स्वाभाविक एवं सहज है।

अपनी आबादी दूसरे इलाकों में भी बढ़ाता है बाघ

आर. श्रीनिवासन ने कहा कि किसी बाघ का अपने भौगोलिक क्षेत्र में आबादी बढ़ाने के साथ ही नजदीकी सोर्स आबादी वाले क्षेत्र में जाकर सम्पर्क करना स्वाभाविक प्रक्रिया है। मध्यप्रदेश के बाघ, बाघ कॉरीडोर से होकर चित्रकूट, रणथंभौर जाकर परिवार बसाकर पुन: लौट चुके हैं। ताजा उदाहरण है पन्ना-112 का। यह बाघ वर्ष 2011 से 2012 तक पूरे एक साल तक रिजर्व से बाहर रहने के बाद पुन: पन्ना लौटा और टी-4, टी-1 और टी-6 के साथ जोड़ा बनाया। अभी बाहर निकले अर्द्ध-वयस्क नर शावक भविष्य में वापस पन्ना टाइगर रिजर्व आ सकते हैं, इसकी पूरी संभावना है।
उल्लेखनीय है कि पन्ना में बाघों द्वारा पूर्व में भी अपनी संतान का त्याग किया जाता रहा है। यह सहज प्रक्रिया है। टी-1 ने अपनी दूसरी संतान के एक शावक को त्याग दिया, टी-4 ने दूसरी लिटर की पूरी संतानों को त्याग दिया, पी-213 ने भी प्रथम संतान को त्यागा और अब टी-5 ने अपनी संतान को त्यागा है। पार्क प्रबंधन इन पर पूरी निगरानी रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करता जाता है।

 
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