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पत्रकारिता के अत्यधिक व्यावसायीकरण से प्रभावित होती है निष्पक्षता

MPNEWSLIVE : 20 जून , 2014 

भोपाल ।।  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वर्तमान समय में पत्रकारिता को सकारात्मक और सृजनात्मक होने की आवश्यकता है। पत्रकारिता के अत्यधिक व्यावसायीकरण से निष्पक्षता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि समाचार-पत्र समाज के मार्गदर्शक हैं और इसी रूप में उनकी भूमिका भविष्य में भी बनी रहेगी। चौहान आज यहाँ माधवराव सप्रे समाचार-पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान की तीसवीं वर्षगांठ के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

      चौहान ने कहा कि दुनिया के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं को किन समाचार-पत्रों ने किन शब्दों में प्रस्तुत किया था यह जानने की जिज्ञासा माधवराव सप्रे संग्रहालय में पूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय की स्थापना इसके संस्थापक पत्रकार विजयदत्त श्रीधर के अथक परिश्रम और दूरदृष्टि का सुफल है। यह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है जो प्रदेश के लिये धरोहर बन गई है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय को और समृद्ध बनाने के लिये राज्य शासन की ओर से आवश्यक सहयोग दिया जायेगा।
     चौहान ने महात्मा गाँधी, माधवराव सप्रे और माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रकारिता का स्मरण करते हुए कहा कि शांति और अहिंसा पत्रकारिता के अस्त्र हैं। उन्होंने हाल में संपन्न अपनी दक्षिण अफ्रीका यात्रा की चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सरकार महात्मा गाँधी की स्मृति को संजोने के लिये एक करोड़ की राशि संबंधित ट्रस्ट को उपलब्ध करवायेगी।
     पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता में अनुसंधान की कमी को माधवराव सप्रे संग्रहालय ने पूरा किया है। इसके लिये उन्होंने विजयदत्त श्रीधर की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्व-प्रेरणा से ही हिन्दी को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस कार्य में संग्रहालय को पूरा सहयोग मिलेगा।
इस अवसर पर विगत पाँच दशक से पत्रकारिता कर रहे अशोक मानोरिया और विख्यात चित्रकार-चिंतक और लेखक अमृतलाल वेगड़ को सम्मानित किया गया। माधवराव सप्रे की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिये छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी का भी सम्मान किया जाना था लेकिन खराब मौसम के चलते वह उपस्थित नहीं हो सके। उनके प्रतिनिधि विक्रम सिसोदिया ने डॉ. रमन सिंह की ओर से सम्मान ग्रहण किया। अशोक मानोरिया ने अपने पत्रकारिता जीवन के अनुभवों को साझा किया। अमृतलाल वेगड़ ने कहा कि पत्रकारिता शब्दों से प्यार करती है शब्दों का व्यापार नहीं करती।
     इस अवसर पर मुख्यमंत्री चौहान ने के.जी. व्यास द्वारा लिखित 'भारत का परम्परागत जल विज्ञान'' किताब का विमोचन किया। विजयदत्त श्रीधर ने सप्रे संग्रहालय के तीन दशक की रोमांचक यात्रा की चर्चा की। उन्होंने बताया कि 1984 में छोटे से कमरे से शुरू हुए इस संग्रहालय में आज हिन्दी पत्रकारिता से संबंधित 70 लाख संदर्भ सामग्री है, जो अन्यत्र उपलब्ध नहीं है। यह संग्रहालय न सिर्फ हिन्दी पत्रकारिता के शोधार्थियों के लिये बल्कि समाज-विज्ञानियों के लिये भी एक तीर्थ बन चुका है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी ख्याति पहुँच रही है। उन्होंने संग्रहालय की स्थापना से जुड़े परिवारों, संस्थाओं, जनसंपर्क विभाग और राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
      इस अवसर पर जनसंपर्क आयुक्त राकेश श्रीवास्तव, राजधानी के बुद्धिजीवी, नागरिक, कवि, लेखक, पत्रकार एवं अनुसंधानकर्ता उपस्थित थे।

 
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