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प्रकृति में गहरी श्रद्धा और भारतीय चिन्तन ही पर्यावरणीय संकट का बेहतर समाधान

MPNEWSLIVE :6 सितम्बर  , 2014 

भोपाल ।। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रकृति में गहरी श्रद्धा और आदर भाव रखना ही जलवायु परिवर्तन के खतरों को रोकने का भारतीय समाधान है। उन्होंने कहा कि प्रकृति में सभी जीवित प्राणियों के जीवन के लिये पर्याप्त संसाधन हैं। इन संसाधनों के अंधाधुंध शोषण से जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। 

   चौहान 'पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और भारतीय दर्शन- संकट से समाधान की ओर' विषय पर मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के सभागार में राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहकार्यवाह श्री सुरेश सोनी थे। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, मुख्य सचिव श्री अंटोनी डि सा और बड़ी संख्या में प्रदेश और देश से आये वैज्ञानिक एवं विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे। सम्मेलन का आयोजन पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन के राज्य जलवायु परिवर्तन ज्ञान प्रबंधन केन्द्र द्वारा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से किया गया था।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा में नदी, पहाड़, पेड़-पौधे, जीव-जंतुओं को भी पूजने और सम्मान देने का संस्कार है। हर देवी-देवता का एक प्रिय पशु है जिस पर वे सवारी करते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सभ्यता में पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों के प्रति खंडित सोच रहती है जबकि भारतीय दर्शन में समग्र दृष्टि होती है। इसलिये पर्यावरण के सभी अंगों, मनुष्य और वन्य-जीवों में एक ही चेतना का प्रवाह माना गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिये जल-स्रोतों को जीवित करने, बड़ी मात्रा में पौधे लगाने, पेड़ों की सुरक्षा करने और पर्यावरण प्रदूषण कम करने के लिये समन्वित प्रयास किये हैं।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जलवायु परिवर्तन ज्ञान प्रबंधन केन्द्र द्वारा जलवायु परिवर्तन पर तैयार की गयी कार्य-योजना के दस्तावेज का विमोचन किया। उन्होंने केन्द्र की वेबसाइट एसकेएमसीसीसीडॉटनेट www.skmccc.net का विमोचन किया।

भारतीय चिंतन से ही पर्यावरण मित्र तकनीकी विकसित होगी - श्री सुरेश सोनी

मुख्य वक्ता श्री सुरेश सोनी ने कहा कि अंधाधुंध प्रगति की दौड़ से मानव जाति सर्वाधिक संक्रमित काल से गुजर रही है। यदि इसे रोका नहीं गया तो सदी के अंत तक मानव जाति के समक्ष अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो जाएगा। इस संकट से निकलने के लिये मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, राजनैतिक और आर्थिक सभी आयामों में परिवर्तन के प्रयास करने होंगे। माइन्ड और मैटर को अलग-अलग मानने की अवधारणा को छोड़ना होगा। भारत की वैश्विक दृष्टि और चिंतन से ही पर्यावरणीय मानसिकता और पर्यावरण मित्र तकनॉलाजी विकसित होगी। इसके लिये समाज, शासन और प्रशासन को एक साथ आगे आना होगा। प्रकृति के साथ रहने और जितनी भरपाई हो सके उतने दोहन के प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश और दुनिया को इस दिशा का दर्शन करा सकता है। यहाँ प्राकृतिक सम्पदा की बहुतायत है। उन्होंने नर्मदा नदी को अमरकंटक से प्रदूषणमुक्त करने, उसके किनारे पर रहने वालों को जागरूक करने के प्रयासों के साथ ही मृत जल संरचनाओं के पुनर्जीवन के प्रयासों की जरूरत बताई। एप्को के कार्यकारी संचालक श्री अजातशत्रु ने आभार व्यक्त किया।

 
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