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किसानों की समृद्धि और विकास को समर्पित है कृषि महोत्सव

MPNEWSLIVE :26 सितम्बर , 2014 

भोपाल ।। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जन-प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे 25 सितम्बर से शुरू हो चुके कृषि महोत्सव की विभिन्न गतिविधियों में भाग लें और किसानों की उपलब्धियों का सम्मान करते हुए उनका उत्साहवर्धन करें। उन्होंने जन-प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि 2 अक्टूबर से प्रारंभ होने वाले 'स्वच्छ भारत' अभियान को सफल बनाने के लिये समाज के हर सदस्य को इस अभियान से जोड़ें।

मुख्यमंत्री  चौहान ने आज यहाँ मंत्रालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जन-प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कृषि महोत्सव के दौरान होने वाले कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा िक कृषि महोत्सव किसानों की समृद्धि और विकास को समर्पित है। जिलों, विकासखण्डों और आदर्श गाँवों को कृषि एवं इससे जुड़ी गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये सम्मानित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिलों, विकासखण्डों, गाँवों में कृषि रथ पहुँचने की तारीख और समय की जानकारी किसानों को पहले से मिल जाना चाहिए। इससे वे समय निकाल कर कृषि रथ के स्वागत के लिये उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि में 24.99 प्रतिशत वृद्धि दर का रिकार्ड बनाने की उपलब्धि एक पड़ाव मात्र है। अभी और आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन को बढ़ावा देना जरूरी है। खेती को लाभकारी बनाने के हर प्रयास और तकनीकी की जानकारी गाँव-गाँव में हर किसान तक पहुँचना चाहिए। मंत्री, विधायक, पंचायतों के जन-प्रतिनिधि सक्रिय रूप से कृषि महोत्सव में भाग लें और किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन दें। अपने स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास भी करें।
श्री चौहान ने जन-प्रतिनिधियों को बताया कि कृषि महोत्सव के दौरान विकासखण्ड और गाँव स्तर पर कृषि विशेषज्ञों का भ्रमण होगा। इन विशेषज्ञों के ज्ञान का भरपूर लाभ किसानों को मिलना चाहिए। उन्होंने स्व-सहायता समूहों, अशासकीय संगठनों, प्रगतिशील किसानों को कृषि महोत्सव की गतिविधियों से जोड़ें।
श्री चौहान ने कृषि में यंत्रों के उपयोग के लाभ गिनाते हुए महोत्सव में माइक्रो इरीगेशन जैसी तकनीक को लोकप्रिय बनाने की पहल करने का आग्रह किया। जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने, जल उपभोक्ता संथाओं को सक्रिय बनाने, खसरा-खतौनी उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया।

स्वच्छ भारत - स्वच्छ मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दो अक्टूबर से शुरू होने वाले स्वच्छ भारत अभियान को जन-आंदोलन बनाने और स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के कार्यक्रम संचालित किये जायेंगे। प्रधानमंत्री की सोच और राज्य की इच्छाशक्ति के चलते इस अभियान को प्रत्येक नागरिक का अभियान बनाना होगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि अभियान के लिये पहले चरण में दो अक्टूबर तक सभी जन-प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में वातावरण निर्माण करेंगे। दो अक्टूबर को मुख्य सचिव से लेकर निचले स्तर तक हर शासकीय कर्मचारी अभियान में भाग लेगा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं अभियान का नेतृत्व करेंगे। हर नागरिक इस अभियान में भागीदारी करेगा। स्वच्छता के लिये हर नागरिक अपने-अपने स्तर पर प्रचार भी कर सकता है। शालाओं के बच्चे सक्रिय रूप से इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि ज्ञान के मंदिर शालाओं की सफाई करना कोई बुरा काम नहीं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों, महाविद्यालयों, शालाओं, सब्जी मंडियों, सड़कों के किनारों और जहाँ-जहाँ कचरा इकट्ठा होता है वहाँ की सफाई की जिम्मेदारी नागरिकों को आगे बढ़कर लेना होगी। स्वच्छता बनाये रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 2 अक्टूबर से 19 नवम्बर तक की गतिविधियों की जानकारी देते हुये जन-प्रतिनिधियों से कहा कि वे गाँवों, शहरों, कस्बों की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से स्वच्छता कार्यक्रम बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 तक खुले में शौच जाने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लेना होगा। इसके लिये हर घर में शौचालय होना जरूरी है।

 

 

 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जन-प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे 25 सितम्बर से शुरू हो चुके कृषि महोत्सव की विभिन्न गतिविधियों में भाग लें और किसानों की उपलब्धियों का सम्मान करते हुए उनका उत्साहवर्धन करें। उन्होंने जन-प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि 2 अक्टूबर से प्रारंभ होने वाले 'स्वच्छ भारत' अभियान को सफल बनाने के लिये समाज के हर सदस्य को इस अभियान से जोड़ें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज यहाँ मंत्रालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जन-प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कृषि महोत्सव के दौरान होने वाले कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा िक कृषि महोत्सव किसानों की समृद्धि और विकास को समर्पित है। जिलों, विकासखण्डों और आदर्श गाँवों को कृषि एवं इससे जुड़ी गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये सम्मानित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिलों, विकासखण्डों, गाँवों में कृषि रथ पहुँचने की तारीख और समय की जानकारी किसानों को पहले से मिल जाना चाहिए। इससे वे समय निकाल कर कृषि रथ के स्वागत के लिये उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि में 24.99 प्रतिशत वृद्धि दर का रिकार्ड बनाने की उपलब्धि एक पड़ाव मात्र है। अभी और आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन को बढ़ावा देना जरूरी है। खेती को लाभकारी बनाने के हर प्रयास और तकनीकी की जानकारी गाँव-गाँव में हर किसान तक पहुँचना चाहिए। मंत्री, विधायक, पंचायतों के जन-प्रतिनिधि सक्रिय रूप से कृषि महोत्सव में भाग लें और किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन दें। अपने स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास भी करें।

श्री चौहान ने जन-प्रतिनिधियों को बताया कि कृषि महोत्सव के दौरान विकासखण्ड और गाँव स्तर पर कृषि विशेषज्ञों का भ्रमण होगा। इन विशेषज्ञों के ज्ञान का भरपूर लाभ किसानों को मिलना चाहिए। उन्होंने स्व-सहायता समूहों, अशासकीय संगठनों, प्रगतिशील किसानों को कृषि महोत्सव की गतिविधियों से जोड़ें।

श्री चौहान ने कृषि में यंत्रों के उपयोग के लाभ गिनाते हुए महोत्सव में माइक्रो इरीगेशन जैसी तकनीक को लोकप्रिय बनाने की पहल करने का आग्रह किया। जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने, जल उपभोक्ता संथाओं को सक्रिय बनाने, खसरा-खतौनी उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया।

स्वच्छ भारत - स्वच्छ मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दो अक्टूबर से शुरू होने वाले स्वच्छ भारत अभियान को जन-आंदोलन बनाने और स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के कार्यक्रम संचालित किये जायेंगे। प्रधानमंत्री की सोच और राज्य की इच्छाशक्ति के चलते इस अभियान को प्रत्येक नागरिक का अभियान बनाना होगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि अभियान के लिये पहले चरण में दो अक्टूबर तक सभी जन-प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में वातावरण निर्माण करेंगे। दो अक्टूबर को मुख्य सचिव से लेकर निचले स्तर तक हर शासकीय कर्मचारी अभियान में भाग लेगा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं अभियान का नेतृत्व करेंगे। हर नागरिक इस अभियान में भागीदारी करेगा। स्वच्छता के लिये हर नागरिक अपने-अपने स्तर पर प्रचार भी कर सकता है। शालाओं के बच्चे सक्रिय रूप से इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि ज्ञान के मंदिर शालाओं की सफाई करना कोई बुरा काम नहीं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों, महाविद्यालयों, शालाओं, सब्जी मंडियों, सड़कों के किनारों और जहाँ-जहाँ कचरा इकट्ठा होता है वहाँ की सफाई की जिम्मेदारी नागरिकों को आगे बढ़कर लेना होगी। स्वच्छता बनाये रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 2 अक्टूबर से 19 नवम्बर तक की गतिविधियों की जानकारी देते हुये जन-प्रतिनिधियों से कहा कि वे गाँवों, शहरों, कस्बों की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से स्वच्छता कार्यक्रम बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 तक खुले में शौच जाने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लेना होगा। इसके लिये हर घर में शौचालय होना जरूरी है।


 
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