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भाजपा की जीत टीम वर्क से, कांग्रेस में न भरोसा, न तालमेल

MPNEWSLIVE : 04 फरवरी, 2015

भोपाल ।। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और छिंदवाड़ा की नगर निगमों में भी भारतीय जनता पार्टी के कब्जे के बाद शहरों से कांग्रेस का सफाया हो गया है। पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनावों में मिली कांग्रेस को हार के बाद अब नगरीय निकाय चुनावों में भी जनता ने भाजपा में भरोसा जताया है।

हालांकि अभी कुछ जगह आधिकारिक परिणामों की घोषणा होना बाकी है जिसमें भाेपाल नगर निगम भी शामिल है। इंदौर, जबलपुर और छिंदवाड़ा में भाजपा के महापौर प्रत्‍याशी की जीत के साथ पार्टी की परिषद बनना तय हो गया है जबकि भोपाल में भाजपा के महापौर उम्‍मीदवार की जीत तय बताई जा रही है।
कांग्रेस ने विधानसभा-लोकसभा चुनावों के बाद नगरीय निकाय चुनावों में अपने लगातार कमजोर प्रदर्शन को दोहराया है। नगर निगम चुनाव नतीजों से साफ हो गया है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भरोसा डगमगा गया है। चुनाव में उनके शीर्ष नेताओं के बीत तालमेल ही दिखाई नहीं दिया। वहीं भाजपा की जीत में बहुत बड़ी भूमिका उनके टीमवर्क की है और वहां सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान से लेकर संगठन के पदाधिकारी एकसाथ चुनाव लड़ने में अपना-अपना रोल निभाते हैं।
 नगर निगम चुनावों में प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं से लेकर नीचे तक के कार्यकर्ताओं में एक तालमेल दिखाई दिया। हालांकि टिकट वितरण के समय और उसके कुछ दिन बाद जरूर नाराज नेताओं ने विरोध प्रकट किया लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाइश देकर शांत कर दिया। कुछ असंतोष रहा भी तो उसका विशेष असर पार्टी के प्रदर्शन पर नहीं दिखा।
भाजपा की जीत में सबसे ज्यादा मेहनत मुख्यमंत्री ने की जिन्होंने कई किलोमीटर के रोड शो किए। उनके वादों पर मतदाताओं ने भरोसा जताया। उनके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकिशोर चौहान से लेकर राज्य के मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों ने भी अलग-अलग स्थानों की कमान संभाल रखी थी।
वहीं कांग्रेस की हार में उसका बिखरा-बिखरापन नजर आया। प्रदेश कांग्रेस के संगठन ने जहां टिकट वितरण को ही अपनी जिम्मेदारी समझ लिया था तो पार्टी के दिग्गज नेताओं ने चुनिंदा सभाएं लेकर रस्म अदायगी की। टिकट वितरण को लेकर उपजे असंतोष को प्रदेश कांग्रेस का संगठन समय पर शांत नहीं कर पाया जिससे कुछ तो बागी हो गए और कुछ ने भीतरघात करने में कमी नहीं छोड़ी।
टिकट वितरण को लेकर भोपाल नगर निगम के महापौर प्रत्याशी कैलाश मिश्रा ने भी टिप्पणी की थी कि अगर कुछ टिकट और सही बांट दिए जाते तो कांग्रेस की स्थिति और मजबूत होती। यही नहीं दिग्गजों की मेहनत कहीं भी दिखाई नहीं दी। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव भी प्रचार के लिए वैसे नहीं घूमे जैसे बीजेपी सरकार के मंत्री, संगठन पदाधिकारी गली-गली नजर आए।

 
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