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सारे मंत्री बेदाग, लोकायुक्त संगठन ने दी क्लीनचिट

MPNEWSLIVE : 29 जून, 2015

भोपाल ।। लोकायुक्त जस्टिस पीपी नावलेकर के छह वर्षीय कार्यकाल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित दस मौजूदा और पूर्व मंत्रियों को क्लीनचिट मिली है।

मंत्रियों के ऊपर पद के दुरुपयोग से लेकर अनुपातहीन संपत्ति के मामले दर्ज हुए थे। अधिकांश प्रकरण 2013 में बंद हुए। फरवरी 2015 में तत्कालीन उद्योग एवं वाणिज्यिमंत्री (मौजूदा गृहमंत्री) बाबूलाल गौर और व्यापमं घोटाले में जेल में बंद तत्कालीन खनिज मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को क्लीनचिट मिली।
पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस के मामले भी बंद हो गए हैं। कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश पर विशेष स्थापना पुलिस, जबलपुर ने प्राथमिक जांच तो दर्ज की पर सुप्रीम कोर्ट के स्थगन के कारण मामला जहां के तहां पड़ा है।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के सदस्य अजय दुबे ने सूचना का अधिकार से हासिल की नोटशीट के हवाले से बताया कि ज्यादातर मंत्रियों को विधानसभा चुनाव से पहले क्लीनचिट दी गई। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ.गोविंद सिंह ने पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस से जुड़े देवपुत्र पत्रिका और ग्रीनबोर्ड मामले में क्लीनचिट दिए जाने पर आश्चर्य जताते हुए प्रकरण को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने दावा किया है कि अगले एक हफ्ते में कांग्रेस लोकायुक्त और राज्य आर्थिक अपराध्ा अन्वेषण ब्यूरो से जुड़े बड़े खुलासे करेगी। इसमें जिन मंत्रियों को क्लीनचिट दी गई है उनसे जुड़े दस्तावेज भी सार्वजनिक किए जाएंगे। उधर, लोकायुक्त पीपी नावलेकर ने 'नवदुनिया" से कहा कि मंत्रियों के मामले में जो कुछ भी व्यवस्था दी है वो आर्डरशीट में है। विधिसम्मत जो कार्रवाई होनी चाहिए थी वो की गई। जिसे आपत्ति है वो हाईकोर्ट जा सकता है।
प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया बदली
लोकायुक्त संगठन में अब मंत्रियों के खिलाफ सीधे कोई जांच प्रकरण दर्ज नहीं किया जा सकता है। पहले शिकायतकर्ता द्वारा दिए जाने वाले दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद संबंधित विभाग से जरूरत के हिसाब से दस्तावेज मांगकर निर्णय लिया जाता है कि मंत्री की प्रकरण में भूमिका है भी या नहीं। यदि भूमिका पाई जाती है तब ही प्रकरण दर्ज कर जांच में लिए जाने की व्यवस्था बनाई गई है।

 
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