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व्यापमं जैसी संजीवनी को भी नहीं भुना पाई कांग्रेस

MPNEWSLIVE :17 जुलाई, 2015

भोपाल ।। व्यापमं घोटाले को लेकर प्रदेश में नए जोश के साथ पुनर्जीवित होने का प्रयास कर रही कांग्रेस को पार्टी के ही दिग्गज नेताओं का पूरा साथ नहीं मिल पा रहा है। गुरूवार को पार्टी ने जब प्रदेश बंद का आह्वान किया तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव, नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ही सक्रिय रहे, बाकी सारे बड़े नेताओं ने पार्टी के इस आयोजन में कोई रूचि नहीं दिखाई।

प्रभारी महासचिव मोहनप्रकाश भी एक दिन पहले तक तो भोपाल में केंप करते रहे, पूरे प्रदेश का दौरा भी किया लेकिन बंद से ठीक एक दिन पहले नदारद हो गए। पार्टी का कहना है कि वे पूर्व तय कार्यक्रम के चलते मुंबई चले गए थे। पार्टी के आला नेताओं की इस गैर-मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पानी फेर दिया। कार्यकताओं की मानें तो जब तक बड़े नेताओं में एकता और सक्रियता नहीं होगी तो चाहकर भी छोटे कार्यकर्ताओं में नया जोश नहीं भरा जा सकता है।
हालांकि, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अरूण यादव अपने वरिष्ठ नेताओं का बचाव कर रहे हैं। वे कहते है कि कमलनाथ देश से बाहर हैं इसलिए बंद में शामिल नहीं हो पाए। सिंधिया की व्यस्तता संसद की तैयारी में बताई गई है। यादव ने कहा कि सत्यव्रत चतुर्वेदी बीमार हैं, इसलिए वे नहीं आ पाए। बात साफ है कि एक दशक से ज्यादा समय से वनवास भोग रही कांग्रेस के नेता अभी भी एकजुट नहीं होना चाहते हैं। सड़क पर संघर्ष करना तो बहुत दूर की बात है। व्यापमं घोटाले के रूप में पार्टी को एक ऐसी संजीवनी मिली थी जिसकी बदौलत जनता को प्रभावित किया जा सकता था।
पर पार्टी अपने मकसद में सफल नहीं हो पाई। कांग्रेस ने बंद का फैसला लिया, सही किया पर जो तारीख तय की उसमें गड़बड़ कर दी । ईद के ठीक एक दिन पहले बाजार बंद कराने के फैसले की भी लोगों ने आलोचना ही की। आलाकमान को शिकायत भी भेजकर तारीख बदलने की गुहार लगाई गई।
कार्यकर्ताओं का मत था कि यही बंद ईद के एक दिन बाद में रखा जाता तो शायद ज्यादा सफलता मिलती। पार्टी नेताओं को भी चिंतन करना चाहिए कि क्या सिर्फ दिग्विजय, पचौरी, कटारे, अरूण यादव की बदौलत ही व्यापमं मसले को अंजाम तक पहुचाया जा सकता है। व्यापमं से बड़ा कोई मुद्दा कांग्रेस के पास नहीं था।

 
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