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गाँव के विकास में उत्कृष्ट कार्यों के लिए मध्यप्रदेश को मिला प्रथम पुरस्कार

MPNEWSLIVE :23 अप्रैल 2016   
भोपाल ।। मध्यप्रदेश ने पंचायत राज की अवधारणा को वास्तविक धरातल पर उतारकर अनुसूचित क्षेत्रों में किये गये उत्कृष्ट कार्य तथा संवैधानिक उपबंधों के पालन में वर्ष 2015-16 के लिये पूरे देश में पहला स्थान पाया है। अनुसूचित क्षेत्रों में प्रदेश के 20 जिले के 5211 गाँव आते हैं।
पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव 24 अप्रैल को पंचायत दिवस के अवसर पर पुरस्कार लेने झारखंड के जमशेदपुर जायेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विजेता राज्यों को पुरस्कार प्रदान करेंगे। अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत राज को मजबूत करने के लिये मध्यप्रदेश में तीन अलग-अलग आयाम में विशेष प्रबंध कर लगातार उल्लेखनीय कार्य उत्कृष्टता के साथ किये गये हैं। इनमें कोष, कार्यकलाप एवं कार्मिक प्रबंधन शामिल है। ये तीनों आयाम पंचायतों की सफलता के आधार स्तम्भ होते हैं। इन पर फोकस कर मध्यप्रदेश में ग्रामीण विकास की रणनीति बनाकर काम किये गये, जिसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हुई। इस कार्य की प्रशंसा केन्द्र सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति ने भी की थी। समिति ने सभी मापदण्डों पर मध्यप्रदेश को खरा पाया था। यही कारण है कि देश में मध्यप्रदेश को सर्वोच्च स्थान मिला है।
मध्यप्रदेश को 14 वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर इस पंचवर्षीय योजना में 13 हजार 555 करोड़ की राशि प्राप्त होगी। इससे गाँवों में विकास के मूलभूत काम किये जायेंगें। प्रदेश में '' एक पंचायत एक बैंक खाता '' नीति शुरू की गई है। हर पंचायत का लेखा- जोखा एकदम पारदर्शी हो गया है और खर्चे आइने की तरह साफ-साफ नजर आते हैं। चेक से भुगतान पूरी तरह बंद है। अब पैसा पोर्टल के माघ्यम से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जाता हैं। इस कारण भुगतान में पारदर्शिता आयी है और लोगों में विश्वसनीयता बढ़ी है। अब सभी पंचायत के पास एक-एक पैसे का हिसाब बिलकुल अद्यतन रहता है। यह तो हुई कोष या फंड की बात जिससे पूरे देश में मध्यप्रदेश की पहचान बनी है।
पंचायत का दूसरा आधार स्तंभ है यहाँ के कार्यकलाप । प्रदेश में वन अधिकार और रोजगार गारंटी कानून को केन्द्र में रखकर भूमि सुधार और खेती की जमीन के विस्तार के काम भी बड़े पैमाने पर हुए हैं। इसके अलावा भूमि और जल-प्रबंधन, लघु सिंचाई, वाटर शेड विकास के काम मनरेगा से करवाये गये हैं। लोगों को ऐसे रोजगार से जोड़ा गया है जिससे उन्हें अपना घर चलाने के लिये पर्याप्त आय हो रही है। इसमें पशुपालन, रेशम उत्पादन, सामाजिकी वानिकी, लघु वनोपजों का संग्रहण, छोटे-छोटे उद्योग, खाद्य प्र-संस्करण आदि हैं। मूलभूत सुविधाओं जैसे - शौचालय, बारहमासी सड़कें, बिजली, पीने के पानी के इंतजाम आदि से मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार की कसौटी पर खरा उतरा है।
पंचायतों की सफलता का तीसरा स्तंभ-कार्मिक प्रबंध हैं। प्रदेश में पंच-सरपंच, पंचायत सचिव, शिक्षक, पटवारी, सेल्समेन, बीट गार्ड आदि की कार्यप्रणाली में गुणात्मक रूप से बुनियादी सुधार किये गये हैं। लोक सेवा गारंटी योजना का इसमें महत्वपूर्ण योगदान हैं। स्वास्थ्य और स्वच्छता की तर्द्थ समितियों ने अपने कार्यों को बखूबी किया है। महिला स्व-सहायता समूहों ने तो एक से बढ़कर एक रिकार्ड बनाये हैं। इसके अतिरिक्त किसान, युवा, अनुसूचित जाति और किशोर बालिका समूह तो अपेक्षा से अधिक सक्रिय है। इन समूह ने पंचायत राज को एक नई पहचान दी है। ग्राम सभा, आम सभा, ग्राम चौपाल, प्रचार-प्रसार, स्वच्छता अभियान, हरियाली महोत्सव, जल-संरक्षण अभियान तथा जल, जंगल और जमीन के विकास ने व्यवस्था को और मजबूत किया है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश ने पूरे देश में पहला स्थान पाया है।

 
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