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नर्मदा सेवा यात्रा जैसा नदी बचाने कि पूरे देश में सार्थक चर्चा की जायेगी -सदगुरू जग्गी वासुदेव

MPNEWSLIVE : 25 मार्च, 2017
भोपाल ।। आध्यात्मिक गुरू सदगुरू जग्गी वासुदेव ने कहा कि क्या लालच ने मनुष्य को इतना कठोर ह्रदय बना दिया है कि वह जीवन के स्त्रोत को ही नष्ट करने पर उतारू है। उन्होंने कहा कि क्या इतना अमानवीय हो गया हैं कि बच्चों के भविष्य का भी ख्याल नही है। सदगरू ने कहा कि हर जीवन एक दूसरे से जुड़ा है। नर्मदा बहती रहे इसके लिये जरूरी है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जो नर्मदा सेवा यात्रा निकाल रहे हैं वह सबसे अच्छा विकल्प है। नर्मदा गरिमापूर्ण बहती रहे इसके लिये इसके तटों पर पेड़ लगाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के लोग भाग्यशाली है उन्हें एक ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जिसका दिल धड़कता है। नर्मदा सेवा यात्रा को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह यात्रा अभूतपूर्व रूप से सफल होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय से ऐसा अभियान पूरे देश में चलाने की चर्चा की जायेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री को कैलाश तीर्थ पवित्र जल पात्र भेंट किया।

आध्यात्मिक गुरू सदगुरू वासुदेव जग्गी ने कहा है कि पवित्र नर्मदा नदी आनंद देती है। यह सभ्यता की जननी है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि अब हमें सोचना है कि अपनी नदियों के लिये हम क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शरीर में तीन चौथाई पानी है। पानी कोई वस्तु नही है। यह जीवन निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि जब यह शरीर में बहता है तो इसका ख्याल करते हैं लेकिन जब नदियों में बहता है तो उसे गंदा करते हैं।
सदगुरू ने कहा कि नर्मदा और गोदावरी के बीच भारत की सभ्यता फली-फूली है। अब नदियाँ छोटी हो रही हैं। सिकुड़ रही हैं। इसका अर्थ यह है कि हमें अपने भविष्य के प्रति चिंता नही है। उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा जैसा आंदोलन अभी तक हुआ नही। इसका अर्थ यह है कि हम राष्ट्र के लिये कुछ अच्छा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नदियों का विकास करके ही राष्ट्र को महान बनाया जा सकता है।
सदगुरू ने कहा कि हमें बचाने वाली नदियों को अब हमें बचाना होगा। नर्मदा गौरव के साथ बहती रहे इसके लिये इसके किनारों पर पेड़ लगाना जरूरी हो गया है। इसके लिये नीति बनानी होगी। उन्होंने कहा कि नदियों को बचाने के लिये केन्द्र सरकर से वार्ता चल रही है। उन्होंने कहा कि जब भारत में जंगल थे तो नदियाँ भी कल-कल बहती थी। जंगल खत्म होने से नदियों का बहाव कम हो गया है। उन्होंने कहा कि नदियों के किनारों की मिट्टी बचाना जरूरी है नहीं तो सूरज की गर्मी से मिट्टी रेत में बदल जायेगी और रेगिस्तान बन जायेगा। उन्होंने कहा कि देश में इस दिशा मे जागरूकता लाने के लिये कन्या कुमारी से उत्तराखंड तक जन-जागरूकता रैली निकाली जायेगी। उन्होंने कावेरी नदी का स्मरण करते हुए कहा कि अब कावेरी में साठ प्रतिशत तक जल कम हो गया है और यह नदी विवाद का कारण बन गई है।
सदगुरू ने कहा कि भारत ने कई वैज्ञानिक उपलब्धियाँ हासिल की है लेकिन तमाम सीमाओं के साथ देश का किसान देश को अन्न उपलब्ध करा रहा है। दुर्भाग्य यह है कि वह स्वयं का जीवन समाप्त करने के लिये विवश हो जाता है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरकता बरकरार रखना जरूरी है। मिट्टी बचाने से किसान बचेगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे ही चलता रहा अगले पच्चीस सालों में कुछ नहीं उग पायेगा। धरती का पोषण होना जरूरी है।
मालवा के संत कमल किशोर नागर ने भी नदी को बचाने के लिये आत्म-प्रेरणा से प्रयास करने का आव्हान किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पूरे मनोभाव से नर्मदा सेवा यात्रा से जुडे़। उन्होंने कहा कि नदी, कन्या और गाय के संरक्षण का संकल्प लें। 
मुख्यमंत्री ने अपने उदबोधन में कहा कि नर्मदा के बिना जीवन नहीं चल सकता। उन्होंने कहा कि नर्मदा को अविरल बनाने के लिए संपूर्ण समाज को आगे आना होगा। जल की धार बचाने के लिए लाखों लोग करोड़ों पेड़ लगाएंगे। किसानों की जमीन पर फलो के पेड़ लगाए जाएंगे। दो जुलाई को एक साथ वृक्षारोपण किया जायेगा। सभी शहरो में ट्रीटमेंट प्लांट लगाएंगे जिससे गन्दा पानी नदी में मिलने नही पाये। उन्‍होंने शौचालय का उपयोग करने, पूजन सामग्री भी नर्मदा जल में नहीं डालने, मूर्तिया विसर्जित नहीं करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि नर्मदा किनारे विसर्जन कुंड बनाये जाएंगे। मुक्ति-धाम बनाया जायेगा। नशामुक्ति का अभियान पूरे प्रदेश में चलेगा। नर्मदा किनारे शराब की दुकानें बंद कर दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि बेटियों के बिना संसार नहीं चल सकता। बेटियो के मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने वालो को फाँसी होना चाहिए। राज्य सरकार कानून बना रही है। इसे भारत सरकार के पास भेजेंगे।  
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री  नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि  नर्मदा माँ के चरणों में प्रणाम करने शामिल हुआ हूँ। उन्होंने कहा कि सेवा यात्रा में शामिल होकर असीम आनंद का अनुभव हुआ है। उन्होंने कहा कि मनुष्य ने जब अपनी जिम्मेदारी नहीं सम्हाली तो प्रकृति में असंतुलन हुआ है।  आज नदियाँ संकट झेल रही है। मनुष्य के आचरण के कारण यमुना गंगा में प्रदूषण बढ़ा है। शिवराज ने नर्मदा का संकट पहले ही भाँप लिया और यह चेतना  जगाने वाली यात्रा निकाली। उन्होंने कहा क़ि यह आध्यात्मिक कार्यक्रम है और पर्यावरण का सबसे बड़ा अभियान सबसे बड़ा  अभियान बन गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सत्ता की शक्ति का इस्तेमाल जन-कल्याण और पर्यावरण की रक्षा के लिए किया। 
पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन ने चौहान को संत स्वभाव वाले मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि कई भूमिकाएँ निभाई। नर्मदा सेवा यात्रा में शामिल होने का सौभाग्य मिला। नर्मदाजी सबको पानी देती है। किसी की जाति धर्म नहीं पूछती। उन्होंने कहा कि शिवराज जी सज्जन और शालीन है। वे राजनीति के संत है। शिवराज जी और और नर्मदा जी का स्वभाव एक समान है। जन-कल्याण के काम समान भाव से करते है। इस अवसर पर माँ नर्मदा की महाआरती में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री बांद्राभान से शाहगंज तक नर्मदा यात्रा ध्वज लेकर और मती साधना सिंह नर्मदा जल कलश लेकर यात्रा में शामिल हुई। हजारो की संख्या में महिलाएँ और बहनें कलश लेकर यात्रा में शामिल हुईं। नर्मदा यात्रा के शाहगंज आगमन पर लोगों ने नगर को सजाया था।

 
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